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Love Shayri In Hindi-अगर मेरी हार न होती

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मंजिल तो यूँ पार न होती 
अगर मेरी हार न होती अगर मेरी हार न होती 
मेरे दिल की तु अनुभूति है 
जूं  धरती गगन को छूती है 
फिर यूँ छूट जाने 
से मेरी नजर उस पार न होती 
अगर मेरी हार न होती अगर मेरी हार न होती 
मैंने हार हार कर तुझे पाया है
अरसों  बाद क्या नशा छाया है 
जुगनू सी लौ मैं बुझने न दूंगी 
यूँ अपना जूनून छूटने न दूँगी 
हारकर खुद को झुकने न दूँगी 
हाथ पकड़कर तेरा दिल की 
गहराई में उतार लूँगी 
अश्क़ों से लिख दूँगी  प्रेमधारा 
लकीर कभी मिटने न दूँगी 
और इस तरह जिंदगी से मेरी तकरार न होती 
अगर मेरी हार न होती,अगर मेरी हार न होती 
मुस्कुराकर गम को छुपाना है जिंदगी 
कुछ भूलों में याद आना है जिंदगी 
हर बात को मुमकिन बनाना है जिंदगी 
कभी रुलाना कभी हँसाना है जिंदगी 

गुम जाना और मिल जाना है जिंदगी 
आँखों में मेरी  तेरी हंसी की झंकार न होती 
अगर मेरी हार  होती, अगर मेरी हार न होती 













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