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Joint Pain: Causes, Conditions and Symptoms in Hindi

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Let's know about the causes and symptoms of joint pain. The first cause is that we do not follow a healthy lifestyle. The symptom is that immunity starts weakening itself.

Joint Pain: Causes and Symptoms


दोस्तों, मेरा आज का Health Topic है, 'Joint Pain : Causes and Symptoms'. यह रोग आज के समय में तेज रफ़्तार के साथ बढ रहा है. इस रोग से करोड़ो लोग इस भयानक रोग की चपेट में हर साल आ रहे हैं। चिकित्सा विज्ञानं इस रोग क्र कारणों के बारे में यही कहता है कि गठिया के कारण अनजान हैं। मगर आयुर्वेद में इसके कारणों के विषय और चिकित्सा के बारे में विस्तार से लिखा हुआ है।

 Joint Pain Causes

joint pain के कारणों का अभी तक पता नहीं चला है। इसके कई कारण हो सकते हैं। लेकिन किसी एक भोजन को, या किसी अन्य वस्तु को सीधे तौर पर इसका जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सवदेशी चिकित्सा के आधार पर कुछ कारण हैं जो joint पैन पैदा करते हैं।

  • जीवनशैली में नियमों का पालन न करने के कारण
  • गरम मसालों का अधिक प्रयोग
  • कब्ज और एसिड
  • अन्य बीमारियों के कारण
  • केल्सियम की कमी
  • AC का अधिक प्रयोग
  • प्राकृतिक खाद्य पदार्थों उपभोग कम करना
  • चोट लगने के कारण
  • नींद की खराबी
  • कुपोषण
  • मासिक धर्म की खराबी के कारण

Joint Pain Symptoms


  • सुबह दर्द के साथ होना 
  • बार-बार गला सुखना और प्यास अधिक लगना 
  • घुटनों से टक-टक की आवाज होना 
  • जोड़ों में सूजन होना 
  • हाथ की उँगलियाँ फूली हुई लगना 
  • बैठ कर उठने में परेशानी होना 
  • पैरों के तलवों में दर्द होना 
  • जोड़ की हड्डी में दर्द होना 
  • वजन में कमी होना 
  • पेट में कब्ज और गैस का बनना 
  • चलते समय थकावट होना

Food  Habits 


आधुनिक साइंस में डॉक्टर्स का मानना है कि शरीर की सफ़ेद रक्त कणिकाएं जब चीजों के साथ प्रतिरोधक रुख अपनाने लगे अर्थात शरीर की प्रतिरोधक क्षमता विपरीत काम करने लग जाए तो कुछ चीजों को खाते ही शरीर में जॉइंट्स में दर्द, जकड़न होने लगता है। घुटनो, कोहनिओ आदि में सूजन होने लगती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर जॉइंट्स तथा मांसपेशिओं के चारो तरफ एक प्रकार की सूजन बना देती है। अर्थात इम्युनिटी सिस्टम को धोखा लग जाता है। जो खाद्य पदार्थ शरीर के लिए उपयोगी होते हैं, इम्यून सिस्टम उसको गलत समझ लेता है और सुरक्षा में जोड़ों और कमजोर स्थानों के चरों ओर एक सूजन बन जाती है। This is called autoimmunity also.


गलत समय पर अच्छा भोजन भी नकारात्मक प्रभाव ही देता है। यदि आप केला खा रहे हैं तो आपको दही या लस्सी के साथ केले का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इनको एक साथ खाने से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसी प्रकार से यदि चाय के तुरंत पहले या बाद में अगर कोई व्यक्ति आइसक्रीम आदि ठंडी चीज खाता है तो यह भी विपरीत भोजन की श्रेणी में आता है। अतः एक बात साफ़ है कि आयुर्वेद में खानपान को विशेष महत्व दिया गया है। बिना भूख के बार-बार खाना, कम भूख में अधिक खाना, लाल मिर्च या इमली वाली चीजों का अधिक प्रयोग करना, मसालेदार वस्तुओं का सेवन करना इत्यादि बहुत कारण इसमें समाहित हो सकते है।

जिन लोगों को गठिया या अन्य ऐसी बिमारी हो, तो उन सभी लोगों में एक बात समान रूप से मिलती है। उन सभी का पेट खराब रहता है। वैसे तो अधिकतम लोगों का पेट खराब होता है, लेकिन गठिया के रोगियों को पेट में बहुत गैस बनती है। कब्ज की परेशानी उनका पीछा नहीं छोड़ती। एसिड तो सबसे पहले बनता है। यही तीन शारीरिक स्थितियाँ लगभग सारी बिमारियों को शरीर में घुसने में सहायक बनती हैं। आजकल का जिस प्रकार का भोजन हो गया है, वो पेट में सबसे पहले एसिड बनाता है। मैं पुरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि बहुत लोगों को अम्ल के बारे में पता नहीं है।

Acidity


जब हम अपना भोजन खाते हैं तो पेट में जाते ही हमारा लिवर उस खाने को गलाने और हजम करने के लिए HCL यानि कि hydrochloric acid बहुत कम मात्रा में स्रावित करता है। जब हम अधिक गरम तासीर वाली कोई चीज खा लेते हैं, तो उसके लिए शरीर को अधिक hydrochloric acid release करना पड़ता है। ये एसिड आगे उसी खाने मिल जाता है और गैस के साथ शरीर में फ़ैल जाता है। बहुत प्रकार के भोजन ऐसे हैं जो गैस बनाते हैं। जैसे अरवी, भिंडी इत्यादि। एक तरफ तो व्यक्ति के शरीर में एसिड बन रहा है और ऊपर से वातवर्धक वस्तुएं खाने से गैस भी बनने लग जाती है। वात और पित शरीर में बढ़ने लग जाते है। वात के बढ़ने और पित के बिगड़ जाने के शरीर में आहिस्ता से अनेक रोग आ जाते हैं। एक बार इस प्रकार से खून में खराबी आ जाने पर रस, रक्त, मांस, मेद ,अस्थि, मज्जा और शुक्र , समस्त धातुओं में विकार आ जाता है। संपूर्ण शरीर के ढांचे को प्रभावित कर देता है ये गठिया।

मैं आपको मेडिकल साइंस और आयूर्वेद दोनों तरीको से इस स्वास्थ्य विषय पर चर्चा करूँगा। विज्ञान मानता है, कि गठिया कई प्रकार का होता है। जुविनाइल आर्थरिटिस इनमे बहुत खतरनाक माना जाता है और वास्तव में होता भी है। कम आयु के नौजवानों में यह रोग होता है। भोजन खाने के नियमों की जानकारी के अभाव में खुद इस भयानक रोग का शिकार हो जाते हैं।

आयुर्वेद में गठिया को वात रोग की श्रेणी में रखा गया है। कई ग्रंथों में तो गठिया को 80 से 120 प्रकार का माना गया है।







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